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गुरूग्राम (जतिन/राजा) :

हरियाणा सरकार ने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को नई गति देने और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

हरियाणा के राज्यपाल ने वित्तीय वर्ष के आगामी राज्य बजट के विचार-विमर्श और निर्माण के लिए एक उच्च स्तरीय समिति उद्योग-श्रमिक मैत्री परिषद के गठन को मंजूरी दे दी है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में गठित यह परिषद ना केवल बजट निर्माण में मदद करेगी, बल्कि उद्योगपतियों और श्रमिकों के बीच समन्वय स्थापित करने का भी कार्य करेगी।
इस समिति के गठन में सबसे महत्वपूर्ण पहलू गुरुग्राम जैसे बड़े औद्योगिक केंद्र को दिया गया प्रतिनिधित्व है।

राज्य सरकार ने सीआईआई गुरुग्राम जोन के चेयरमैन और कैपारो मारुति के सीईओ विनोद बापना को इस समिति के सदस्य के रूप में नामित किया है। विनोद बापना का चयन उद्योग जगत में उनके व्यापक अनुभव और वित्तीय विशेषज्ञता को देखते हुए किया गया है। बजट प्रक्रिया में उनका शामिल होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार आगामी वित्तीय वर्ष के लिए नीतियों को जमीनी हकीकत और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप बनाना चाहती है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली इस परिषद में सरकार और उद्योग जगत के प्रमुख स्तंभों को शामिल किया गया है, जिसमें श्रम मंत्री अनिल विज, श्रम आयुक्त, और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक सचिव। वही औद्योगिक प्रतिनिधित्व के तौर पर सीआईआई गुरुग्राम जोन के चेयरमैन विनोद बापना के साथ-साथ अन्य मनोनीत सदस्य और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे।

अपनी नियुक्ति पर विनोद बापना ने हरियाणा के माननीय मुख्य्मंत्री नायब सिंह सैनी का धन्यवाद प्रकट करते हुए कहा कि इस समिति का मुख्य फोकस न्यूनतम मजदूरी की दरों का पुनरीक्षण और संशोधन, औद्योगिक विवादों के त्वरित समाधान के लिए पाँच नए श्रम न्यायालयों की स्थापना, कर्मचारियों के लिए बीमा और सामाजिक सुरक्षा पोर्टल की निगरानी, औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रक्रिया का सरलीकरण और विकेंद्रीकरण रहेगा। बापना ने कहा कि उद्योग और श्रम एक-दूसरे के पूरक हैं। इस परिषद के माध्यम से उनका लक्ष्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना रहेगा, जहां विकास और श्रमिक कल्याण साथ-साथ चल सकें।