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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR ) की सीमा के प्रस्तावित रीशेड्यूलिंग से हरियाणा के 60% एनसीआर क्षेत्र यानि पांच जिले बाहर नहीं होंगे। मंगलवार को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की मीटिंग में यह फैसला हुआ। मीटिंग के बाद हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया हरियाणा का पुराना एरिया पहले की तरह ही रहेगा। इसके अलावा एनसीआर एरिया को लेकर राज्यों से प्रस्ताव मांगे गए हैं, जिस राज्य का प्रस्ताव अच्छा होगा, उसे लागू किया जाएगा।
सीएम ने बताया कि एनसीआर रीजन 2047 के प्लान पर भी बैठक में चर्चा हुई है। इसको लेकर एक कमेटी बनाई गई है, जो 15 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौपेंगी। नमो सिटी विकसित करने पर भी राज्यों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। साथ ही एनसीआर में B-6 से नीचे के वाहनों को लेकर परिवर्तन योजना बनाई गई है। आरआरटीएस करनाल की तरफ और मानेसर पर काम चल रहा है। कोर एरिया को लेकर भी चर्चा हुई है।
केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर की अध्यक्ष में हुई मीटिंग के बाद सीएम नायब सैनी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हरियाणा का पुराना एरिया पहले की तरह ही रहेगा। अभी प्रदेश के कुल 23 में से 14 जिले एनसीआर में थे। यदि एनसीआर का दायरा घटता तो करनाल, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी जिले बाहर हो सकते थे।
बताया जा रहा है कि एनसीआर दायरा घटना का सबसे ज्यादा असर राजस्थान पर पड़ता। बदलाव की स्थिति में राजस्थान का सिर्फ भिवाड़ी ही एनसीआर में रह जाता। राजस्थान बदलाव के पक्ष में नहीं था।
सीएम ने बताया कि एनसीआर में 4 आधुनिक नमो सिटी विकसित किए जाएंगे। हालांकि ये कहां होंगे, भी तय नहीं। इसके लिए कमेटी बनाई गई है। राज्यों से भी सुझाव मांगे गए हैं। प्लान-2041 के लिए सब कमेटी बनी है, जो 15 अगस्त तक रिपोर्ट देगी। प्लानिंग बोर्ड की 43वीं बैठक अब दिसंबर में प्रस्तावित है। साथ ही एनसीआर में B-6 से नीचे के वाहनों को लेकर परिवर्तन योजना बनाई गई है। आरआरटीएस करनाल की तरफ और मानेसर पर काम चल रहा है। कोर एरिया को लेकर भी चर्चा हुई है।