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गुरूग्राम, (जतिन/राजा)

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद संपन्न हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारतीय व्यापारिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है। इस समझौते को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है, जो न केवल दो बड़े बाजारों को जोड़ेगा बल्कि वैश्विक व्यापार के समीकरणों को भी बदल देगा।

सीआईआई गुरूग्राम जोन के चेयरमैन विनोद बापना ने इस समझौते का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए संजीवनी बताया है। विनोद बापना ने कहा कि भारत और ईयू के बीच यह समझौता पूरे देश के औद्योगिक क्षेत्र के लिए नए द्वार खोलेगा। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, आईटी और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए यह एक गेम-चेंजर है।

यूरोपीय मानकों की तकनीक तक सीधी पहुंच और कम टैरिफ से हमारे स्थानीय उत्पाद वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। उन्होंने कहा कि हालिया वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी टैरिफ चुनौतियों के बीच, यूरोपीय संघ के रूप में भारत को एक स्थिर और भरोसेमंद पार्टनर मिला है।

यह समझौता मेक इन इंडिया को मेक फॉर द वर्ल्ड में बदलने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। यह समझौता दुनिया की दूसरी विश्व और चौथी (भारत) सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का मिलन है। जिसमें लगभग 2 अरब उपभोक्ताओं का एक एकीकृत मुक्त व्यापार क्षेत्र, दोनों पक्ष मिलकर वैश्विक जीडीपी का 25 प्रतिशत तथा वैश्विक व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा दोनों के पास रहना शामिल रहेगा।

विनोद बापना ने कहा कि इस डील के तहत यूरोपीय कारों पर टैक्स 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत होने की संभावना है। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। वही भारतीय ऑटो पार्ट्स निर्माताओं को यूरोपीय बाजार में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जिससे निर्यात में भारी उछाल आएगा।

इसके अलावा यूरोपीय देशों से ईवी तकनीक और निवेश के भारत आने का रास्ता साफ होगा। विनोद बापना ने कहा कि यह डील 2027 तक लागू होने के बाद भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का केंद्र बना देगी।

यह समझौता केवल व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि यह रोजगार सृजन, तकनीकी उन्नयन और रणनीतिक साझेदारी का एक नया अध्याय साबित होगा।