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अभय ग्रेवाल, भिवानी
71 वर्ष की उम्र में जहां लोग अमूमन आराम की जिंदगी चुनते हैं, वहीं भिवानी के एक पूर्व सैनिक ने खेल के मैदान पर अपनी प्रतिभा का ऐसा लोहा मनवाया है जिसने पूरे प्रदेश को गौरवान्वित कर दिया है। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में 5 जून से 7 जून तक आयोजित एसबीकेएफ खेल प्रतियोगिता में भिवानी के सेक्टर-23 निवासी पूर्व नौसैनिक अजीत सांगवान ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। मूल रूप से गांव कलियाणा तथा हाल सैक्टर-23 निवासी अजीत सांगवान की इस स्वर्णिम सफलता से पूरे भिवानी और विशेषकर सेक्टर-23 में जश्न का माहौल है। अजीत सांगवान जैवलिन थ्रो व डिस्कस थ्रो में गोल्ड व शॉटपुट में सिल्वर पदक हासिल किए। इस उपलब्धि पर सेक्टर-23 वेलफेयर एसोसिएशन के पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह श्योराण, हरपाल सांगवान, डॉ. जगवेंद्र सांगवान, ओमप्रकाश सांगवान, दिलबाग सांगवान, अनिल ठेकेदार और डॉ. जोगेंद्र सांगवान सहित समस्त सेक्टरवासियों ने खुशी जताई तथा बधाई देते हुए सांगवान की इस यात्रा को युवाओं के लिए एक बेमिसाल प्रेरणा बताया।
इस मौके पर सेक्टर-23 वेलफेयर एसोसिएशन के पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह श्योराण ने कहा कि अजीत सांगवान ने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में जज्बा और देश के लिए कुछ करने का जुनून हो, तो उम्र महज एक संख्या बनकर रह जाती है। उन्होंने पहले भारतीय जल सेना में रहकर देश की सीमाओं की रक्षा की और अब खेल के मैदान में पदक जीतकर भिवानी और पूरे हरियाणा का नाम चमकाया है। 71 वर्ष की उम्र में उनकी यह फिटनेस और खेल के प्रति समर्पण हम सभी के लिए, खासकर हमारी युवा पीढ़ी के लिए एक बहुत बड़ी सीख है। पूरा सेक्टर-23 उनकी इस कामयाबी पर गर्व महसूस कर रहा है।
श्योराण ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब अजीत सांगवान ने खेल जगत में अपनी चमक बिखेरी हो। इससे पहले भी वे कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर ढेरों पदक अपने नाम कर चुके हैं। देश सेवा की पृष्ठभूमि से आने के कारण अनुशासन, कड़ी मेहनत और कभी न हार मानने का जज्बा उनके व्यक्तित्व का हिस्सा है। धर्मशाला की वादियों में जब उन्होंने एक के बाद एक तीन पदक अपने नाम किए, तो पूरा खेल स्टेडियम तालियों से गूंज उठा।
महेंद्र सिंह श्योराण ने कहा कि अजीत सांगवान की यह कहानी आज के दौर में हर उस व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा है जो उम्र या परिस्थितियों को अपनी राह का रोड़ा मान लेते हैं। एक सैनिक कभी रिटायर नहीं होता, चाहे वो देश की सीमा हो या खेल का मैदान, उनका यह जज्बा हमेशा देश को आगे बढ़ाने का काम करता रहेगा। भिवानी को अपने इस सुलतान पर नाज है।