Loading

भिवानी।

प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशानुसार अब विभिन्न विभागों के अधिकारी सरकारी विद्यालय गोद लेंगे। अधिकारियों द्वारा स्कूलों के सौंदर्यीकरण करने के साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता संवारी जाएगी। एडीसी दीपक बाबूलाल करवा ने सोमवार को डीआरडीए सभागार में विभागाध्यक्षों के साथ बैठक कर यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि विभागाध्यक्ष सरकारी स्कूलों को गोद लेकर वहां की व्यवस्था दुरुस्त करने की जिम्मेदारी संभालें। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था में बड़ा रचनात्मक और प्रशासनिक बदलाव करते हुए इसकी कमान जिला प्रशासन को सौंपी है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की स्वीकृति से हर जिले के एडीसी को उस जिले का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, डिप्टी डीईओ, जिला परियोजना समन्वयक, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और सरकारी स्कूलों के प्राचार्य स्कूलों के संचालन और व्यवस्थाओं से जुड़े मामलों में एडीसी के पर्यवेक्षण में काम करेंगे।
एडीसी दीपक बाबूलाल करवा ने कहा कि प्रत्येक विभागाध्यक्ष अपने नजदीकी विद्यालय अथवा जिला प्रशासन द्वारा आवंटित विद्यालय को गोद लेकर वहां शिक्षा की गुणवत्ता, स्वच्छता, आधारभूत सुविधाओं तथा पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना की नियमित मॉनिटरिंग करेंगे। डीईईओ विनय जिंदल द्वारा इसके लिए गूगल फॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे सभी विभागाध्यक्ष स्वयं भरेंगे और विद्यालय के निरीक्षण की रिपोर्ट दर्ज करेंगे।
एडीसी ने बताया कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त जवाबदेही का नया ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें निरीक्षण, समीक्षा, सुधार और रिपोर्टिंग की पूरी श्रृंखला एक-दूसरे से जुड़ी रहेगी। इसका उद्देश्य केवल खामियां पकडऩा नहीं, बल्कि स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं, शिक्षण व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को जिला प्रशासन की नियमित निगरानी के दायरे में लाकर समयबद्ध सुधार सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण बच्चों के विकास के तीन प्रमुख स्तंभ हैं। नई व्यवस्था में सबसे पहले उन स्कूलों पर ध्यान दिया जाएगा जहां भवन जर्जर या असुरक्षित हैं। ऐसे भवनों की पहचान कर उन्हें कंडम घोषित कराने, वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित कराने और रिपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया होगी। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों को जोखिम वाले भवन में पढ़ाई न करनी पड़े। भवनों के अलावा बाउंड्री वॉल, जलभराव और अन्य आधारभूत सुरक्षा संबंधी कमियों की भी नियमित समीक्षा होगी।
एडीसी दीपक बाबूलाल करवा ने बताया कि स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता, कच्चे राशन का रखरखाव, पेयजल व्यवस्था, पानी की टंकियों की सफाई, शौचालयों की स्थिति और परिसर की स्वच्छता अब नियमित निरीक्षण किया जाएगा।

किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति, कक्षा संचालन, अनुशासन और शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की भी नियमित समीक्षा की जाएगी। इस अवसर पर एसडीएम महेश कुमार, डीडीपीओ सोमबीर कादयान, डीईईओ विनय जिंदल, एलडीएम राजन मल्होत्रा सहित विभिन्न विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।