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भिवानी:
स्थानीय दिनोद गेट स्थित टिबड़ेवाल सभागार के सामने पिछले 65 वर्षों से रोजी-रोटी कमा रहे छह गरीब परिवारों को जबरन उजाडऩे के प्रयासों ने अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले लिया है। इस दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ पीडि़तों का धरना शुक्रवार को 7वें दिन भी पूरी ताकत के साथ जारी रहा।
धरने पर बैठे प्रभावित परिवारों ने बाहुबल और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इंसाफ की गुहार लगाई। शुक्रवार को धरने को मजबूती देने के लिए माकपा के जिला सचिव कामरेड ओमप्रकाश, युवा कल्याण संगठन के संरक्षक कमल सिंह प्रधान सहित जननायक जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेता पहुंचे, जिनमें युवा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सज्जन कुमार, जिला अध्यक्ष जितेन्द्र भारद्वाज, हल्का प्रधान प्रदीप गोयल, किसान सेल के सचिव अशोक शिहाग और राजेश ग्रेवाल शामिल रहे।
स्थानीय दिनोद गेट उस समय राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश का केंद्र बन गया, जब पिछले साढ़े छह दशकों से मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवारों का पेट पाल रहे छह गरीब परिवारों को उनकी दुकानों से जबरन बेदखल करने की कोशिश की गई। पीडि़तों का आरोप है कि आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद के कुछ नेताओं और पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से इस गैर-कानूनी कृत्य को अंजाम देने का प्रयास किया गया।
इसके विरोध में शुरू हुआ धरना अब एक जन-आंदोलन में तब्दील हो चुका है, जिसे विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का खुला समर्थन मिल रहा है।
धरना स्थल पर पहुंचे प्रमुख नेताओं ने इस घटना को लोकतंत्र और कानून व्यवस्था पर एक गहरा धब्बा करार दिया। माकपा जिला सचिव कामरेड ओमप्रकाश, युवा कल्याण संगठन के संरक्षक कमल प्रधान, जजपा जिला अध्यक्ष जितेंद्र भारद्वाज और हल्का प्रधान प्रदीप गोयल ने संयुक्त रूप से कहा कि पिछले 65 वर्षों से जो परिवार यहां पूरी ईमानदारी से अपनी आजीविका चला रहे हैं, उन्हें उजाडऩे के लिए भाजपा के तथाकथित नेता पुलिस बल को साथ लेकर पहुंच गए। यह कदम न केवल पूरी तरह गैर-कानूनी है, बल्कि हमारी न्याय और सुरक्षा प्रणाली पर भी एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन का मूल कार्य आम जनता को भयमुक्त और सुरक्षापूर्ण माहौल देना है। लेकिन जब खाकी वर्दी वाले ही कुछ असामाजिक तत्वों और बाहुबलियों के साथ मिलकर गरीबों को प्रताडि़त करने और उन्हें डराने-धमकाने लगें, तो आम आदमी सुरक्षा की उम्मीद किससे करेगा।
नेताओं ने पीडि़तों को ढांढस बंधाते हुए साफ किया कि यह लड़ाई केवल उन छह परिवारों की नहीं, बल्कि हर उस गरीब की है जिसकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि इन असामाजिक तत्वों पर तुरंत नकेल कसी जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
सभी संगठनों ने एक सुर में कहा कि वे पूरी तरह से पीडि़त परिवारों के साथ हैं। जब तक इन परिवारों को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता, वे कंधे से कंधा मिलाकर हर संघर्ष में साथ खड़े रहेंगे। इस दमनकारी नीति के खिलाफ यह जंग पूरी तरह से लोकतांत्रिक, संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से तब तक जारी रहेगी, जब तक सरकार और प्रशासन बैकफुट पर नहीं आ जाते।
इस अवसर पर सैनी सभा भिवानी, सैनी कल्याण परिषद भिवानी के प्रधान भूप सिंह सैनी, महात्मा ज्योतिबा फूले जनकल्याण संगठन, किसान सभा, सैनी विचार मंच इंडिया के प्रतिनिधियों जनार्दन कश्श्प, कमलेश शर्मा, ओमप्रकाश दहिया, सुरेश चंद सैनी, पूर्व पार्षद ललित सैनी अब तुम प्रकाश मेहता रिटायर्ड कर्मचारी नेता रामचंद्र विजय दहिया क्रिश्चियन पटवारी शुभम लता मनोज जयवीर सैनी दादरी पिंकी शशि लक्ष्मी सुषमा संजय ताराचंद सतीश राजीव ग्रोवर सूरजभान स्वरूप सैनी प्रधान सैनी कल्याण परिषद सहित सतीश, मुकेश सैनी विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।