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भिवानी, ABHAY GREWAL

हरियाणा सरकार की मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी (एमओटीपी) के विरोध में जिले की नर्सिंग ऑफिसर्स ने सोमवार से तीन दिवसीय हड़ताल का आगाज कर दिया। नर्सिंग ऑफिसर वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के बैनर तले जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, पीएचसी और सीएचसी में नर्सिंग स्टाफ ने दो घंटे तक काम बंद रखकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान इमरजेंसी सेवाओं को सुचारू रखा गया और स्टाफ ने मुस्तैदी से ड्यूटी निभाई। एसोसिएशन ने बताया कि यह सांकेतिक हड़ताल अगले तीन दिन तक जारी रहेगी।
एसोसिएशन के आह्वान पर हुई इस पेन डाउन हड़ताल में नर्सिंग ऑफिसर्स ने कहा कि एमओटीपी पूरी तरह से नर्सिंग कैडर के खिलाफ है। इस पॉलिसी के तहत एक स्टेशन पर पांच साल पूरा कर चुके कर्मचारी को जबरन ट्रांसफर ड्राइव में शामिल होना पड़ेगा, जो अव्यवहारिक है। नर्सिंग ऑफिसर्स ने आरोप लगाया कि सरकार ने पॉलिसी लागू करने से पहले उनसे कोई सुझाव नहीं लिया और न ही कोई चर्चा की। डीजीएचएस को कई बार रिप्रेजेंटेशन देने के बावजूद उनकी समस्याओं को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी नर्सिंग स्टाफ को घर से बेघर करने जैसी है, जो बिल्कुल मंजूर नहीं है। हड़ताली नर्सिंग ऑफिसर्स ने बताया कि वे स्वास्थ्य मंत्री और सीएस हेल्थ से मीटिंग के लिए डीजीएचएस को बार-बार पत्र लिख चुके हैं, लेकिन डीजीएचएस द्वारा मीटिंग नहीं करवाई जा रही है।
विरोध में शामिल एसएनओ सुषमा, एसएनओ सरला कुमारी, सुमन राणा, बिंदू, निशा, प्रशांत, रेखा, अंजू शर्मा, ज्योति, सुशीला आदि ने कहा कि नर्सिंग कैडर में 98 प्रतिशत महिलाएं हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। नर्सिंग स्टाफ को मॉर्निंग, इवनिंग और नाइट शिफ्ट करनी पड़ती है। दूसरे जिले में ट्रांसफर होने पर उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी के परिवार वर्तमान स्टेशन पर बसे हुए हैं, ऐसे में ट्रांसफर से बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की देखभाल पर बुरा असर पड़ेगा। यह पॉलिसी महिला और पुरुष दोनों नर्सिंग ऑफिसर्स के लिए परेशानी का कारण बनेगी।

नर्सिंग एसोसिशन की ये हैं प्रमुख मांगें
एसोसिएशन ने मांग की है कि एमओटीपी लागू करने से पहले खाली पदों की सूची जारी कर उन्हें भरा जाए। अगर पॉलिसी लागू करनी है तो अन्य महिला कर्मचारियों की तरह 9 से 5 बजे की एक शिफ्ट में ड्यूटी दी जाए। ट्रांसफर सिर्फ सहमति और खाली पदों पर ही हो। साथ ही नूंह, मेवात, पलवल में कार्यरत स्टाफ को डॉक्टरों की तरह मेवात अलाउंस दिया जाए, नई भर्ती पर वहां के पुराने स्टाफ को गृह जिला दिया जाए, जिला अस्पताल में रोटेशन ड्यूटी जिले के अंदर ही हो और म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प भी दिया जाए।