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भिवानी।

एक ऐसी नाबालिग बच्ची की दर्दनाक कहानी सामने आई है, जिसके सिर से मां का साया उठ चुका था और पिता भी उसे छोड़कर चले गए थे। महज 14 वर्ष की उम्र में योगेश नामक युवक ने कथित तौर पर उसे बंधक बना लिया और करीब एक साल तक उसकी स्वतंत्रता छीनकर अपने कब्जे में रखा। किसी तरह वहां से भागकर बच्ची अपने गृह राज्य असम पहुंची, लेकिन वहां भी उसे अपनाने और अपने घर में रखने वाला कोई नहीं मिला। बेघर, बेसहारा और असुरक्षित बच्ची आखिरकार दोबारा भिवानी लौट आई। उसे क्या मालूम था कि जिस पुलिस से वह सुरक्षा की उम्मीद लेकर संपर्क करेगी, उसी पुलिस व्यवस्था के एक कर्मचारी की भूमिका उसके जीवन की एक और भयावह त्रासदी से जुड़ जाएगी।

हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा ने इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य  प्रियंक कानूनगो को शिकायत भेजकर स्वतंत्र जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
रेलवे स्टेशन पर विवाद से बीटीएम चौकी तक पहुंची बच्ची, फिर शुरू हुआ शोषण का दूसरा अध्याय बच्ची के साथ हुए घटनाक्रम के अनुसार, असम से वापस भिवानी आने के बाद रेलवे स्टेशन पर उसका एक महिला के साथ विवाद हो गया। इस संबंध में डायल 112 पर कॉल की गई और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस बच्ची को ठज्ड चैकी ले गई। यहीं से मामले का सबसे गंभीर और चैंकाने वाला पहलू सामने आता है।
आरोप है कि बीटीएम चौकी में तैनात हेड कांस्टेबल रोहित (बेल्ट नंबर 64, भिवानी) ने बच्ची को नियमानुसार बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने और संरक्षण गृह भेजने के बजाय अपने परिचित शंकर, जो सुरभि रेस्ट हाउस का संचालक बताया जाता है, के हवाले कर दिया।
एक नाबालिग बच्ची, जिसकी मां नहीं थी, पिता ने साथ छोड़ दिया था और जो पहले ही एक साल तक कथित रूप से बंधक रह चुकी थी, उसे बाल संरक्षण तंत्र के सुपुर्द करने के बजाय निजी व्यक्ति के पास क्यों भेजा गया? पुलिस चैकी में यह निर्णय किसके आदेश पर लिया गया? क्या इसकी कोई लिखित एंट्री या आधिकारिक रिकॉर्ड है?

सुरभि रेस्ट हाउस में साढ़े तीन महीने तक कथित कैद, दुष्कर्म और देह व्यापार

शंकर के सुरभि रेस्ट हाउस में बच्ची को कथित तौर पर करीब साढ़े तीन महीने तक बंधक बनाकर रखा गया। बच्ची के आरोपों के अनुसार, इस दौरान शंकर ने उसके साथ दुष्कर्म किया और उससे देह व्यापार भी करवाया गया। बच्ची किसी तरह वहां से भागने में सफल रही। इसके बाद रोहतक की अंजलि नामक महिला उसे अपने साथ ले गई। आरोप है कि अंजलि ने भी बच्ची की असहाय स्थिति का फायदा उठाया और उसका यौन शोषण किया।
एक नाबालिग बच्ची, जो पहले ही एक साल तक बंधक रह चुकी थी, फिर साढ़े तीन महीने तक कथित यौन शोषण और देह व्यापार का शिकार बनी और बाद में एक अन्य महिला के हाथों भी शोषण झेलने का आरोप लगा रही है। यह घटना बाल संरक्षण व्यवस्था की संवेदनशीलता और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
शंकर और अंजलि गिरफ्तार, लेकिन रोहित को किसका संरक्षण?
सुशील वर्मा ने कहा कि पुलिस ने शंकर और अंजलि को गिरफ्तार किया है, लेकिन हेड कांस्टेबल रोहित की भूमिका पर की गई कार्रवाई बेहद सवालों के घेरे में है।
दिनांक 14.10.2026 की जांच रिपोर्ट में रोहित की भूमिका का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, उसने शंकर से संपर्क किया और बच्ची को रात में निजी गेस्ट हाउस में ठहराने तथा अगली सुबह पैसे देकर भेजने की बात कही। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि उसने बच्ची को उचित बाल संरक्षण व्यवस्था में नहीं पहुंचाया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित नहीं किया।
इसके बावजूद उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 199 के तहत सरकारी कर्तव्य में कोताही से संबंधित आरोप तक कार्रवाई सीमित दिखाई देती है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या एक पुलिसकर्मी की जिम्मेदारी केवल इतनी थी कि वह बच्ची को किसी निजी गेस्ट हाउस तक पहुंचा दे? क्या यह जांच की गई कि शंकर से उसका क्या संबंध था और उसने बच्ची को उसके हवाले क्यों किया?
आरोप है कि पुलिस अधीक्षक ने भी हेड कांस्टेबल रोहित को निलंबित नहीं किया। यदि जांच रिपोर्ट में उसकी भूमिका स्वीकार की गई है, तो उसके विरुद्ध केवल मामूली कार्रवाई क्यों? क्या पुलिस विभाग अपने ही कर्मचारी की संभावित आपराधिक भूमिका की निष्पक्ष जांच करने को तैयार है?

पुलिस जांच पर पांच बेहद गंभीर सवाल
सुशील वर्मा ने पुलिस जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच अभी भी आवश्यक हैरू
1. योगेश कहां है? जिसने कथित तौर पर 14 वर्ष की बच्ची को एक साल तक बंधक बनाकर रखा, पुलिस ने उसका पता लगाने और उसकी गिरफ्तारी के लिए क्या ठोस कार्रवाई की?
2. सुरभि रेस्ट हाउस में अन्य आरोपी कौन थे? साढ़े तीन महीने तक बच्ची को वहां बंधक रखने के दौरान उसके साथ किन-किन लोगों ने दुष्कर्म किया? क्या उन सभी की पहचान की गई? क्या संभावित ग्राहकों और अन्य संलिप्त व्यक्तियों की जांच हुई?
3. भ्ब्रोहित को किसने बचाया? जब उसकी भूमिका जांच रिपोर्ट में दर्ज है, तो उसके विरुद्ध केवल कर्तव्य में लापरवाही तक मामला सीमित क्यों रखा गया? उसे निलंबित न करने का आधार क्या है?
4. btm चैकी में क्या हुआ था? बच्ची को ब्ॅब् के हवाले करने के बजाय शंकर तक पहुंचाने का निर्णय किसने लिया? क्या जनरल डायरी, ड्यूटी रजिस्टर और डायल 112 की रिकॉर्डिंग की जांच हुई?
5. क्या पुलिस ने मानव तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच की? योगेश, शंकर, अंजलि और अन्य संभावित आरोपियों के बीच संपर्कों, पैसों के लेन-देन और संगठित शोषण की कड़ियों को खंगाला गया?

सुशील वर्मा की मांगरू स्वतंत्र एजेंसी से जांच हो, पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय हो

सुशील वर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से निम्नलिखित कार्रवाई की मांग की है

’ हेड कांस्टेबल रोहित की भूमिका की स्थानीय पुलिस से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा आपराधिक जांच कराई जाए।
’ रोहित को निलंबित करने और उसके विरुद्ध लागू होने वाली सभी आपराधिक धाराओं की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
’ योगेश की पहचान, गिरफ्तारी और बच्ची को एक साल तक बंधक रखने के आरोपों की जांच की जाए।
’ सुरभि रेस्ट हाउस में बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म करने वाले सभी व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई हो।
’ शंकर और अंजलि के अतिरिक्त संभावित ग्राहकों, सहयोगियों और मानव तस्करी के नेटवर्क की जांच की जाए।
’ ठज्ड चैकी की डायल 112 कॉल, पुलिस रिकॉर्ड, ब्ब्ज्ट, कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और गेस्ट हाउस के रिकॉर्ड सुरक्षित कर उनकी फोरेंसिक जांच कराई जाए।
’ यह जांच हो कि बाल कल्याण समिति और जिला बाल संरक्षण इकाई को समय पर सूचना क्यों नहीं दी गई और किस स्तर पर बाल संरक्षण कानूनों की अवहेलना हुई।
’ बच्ची को सुरक्षा, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श, पुनर्वास और मुआवजा दिलाया जाए।