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भिवानी की बॉक्सर प्रीति पंवार स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में के फाइनल में पहुंच गई हैं। उन्होंने 54 किलोग्राम भार वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में जाम्बिया की कैथरीन मवापे को 5-0 से हराया। प्रीति बड़सेरा गांव की रहने वाली हैं।
वहीं, भिवानी की डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा कालीरमन ने ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। सीमा ने तीसरे प्रयास में 58.65 मीटर दूर चक्का फेंककर यह उपलब्धि हासिल की।
भिवानी के दिनोद गांव की रहने वाली सीमा का सफर आसान नहीं रहा। चोट, शादी और फिर प्रेग्नेंसी के कारण उन्हें दो सीजन खेल से दूर रहना पड़ा। बेटे रुद्र के जन्म के बाद वापसी का फैसला किया। सीमा बताती हैं, ट्रेनिंग के दौरान अच्छे थ्रो पर कोच सिर्फ ‘हां-हां, ठीक है’ कहते हैं, लेकिन 4 साल का रुद्र हर बार ‘हां मम्मी, बहुत अच्छे… वेरी गुड’ बोलता है। यही शब्द उन्हें सबसे ज्यादा हौसला देते हैं। पति रविंद्र, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के डिस्कस थ्रोअर हैं, उनकी कोचिंग में सीमा ने दमदार वापसी की।
कॉमनवेल्थ गेम्स के डिस्कस थ्रो फाइनल में सीमा कालीरमन के सामने कड़ी चुनौती थी। उन्हें कुल छह प्रयास मिले, जिनमें चार फाउल रहे। इसके बावजूद उन्होंने दबाव में शानदार वापसी की। दूसरे प्रयास में 57.32 मीटर का थ्रो कर तीसरे स्थान पर पहुंचीं, जबकि तीसरे प्रयास में 58.65 मीटर का थ्रो कर अपना ब्रॉन्ज लगभग पक्का कर लिया। इसके बाद उनके तीनों प्रयास फाउल रहे, लेकिन कोई भी खिलाड़ी उनके सर्वश्रेष्ठ थ्रो को पीछे नहीं छोड़ सका।
कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले भुवनेश्वर में हुई नेशनल इंटर-स्टेट एथलेटिक्स मीट में सीमा ने 59.73 मीटर का अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने 2026 एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई किया।
जीत के बाद सीमा ने कहा, “मैदान पर वापसी आसान नहीं थी। एक समय ऐसा था जब मैं ठीक से डिस्कस भी नहीं फेंक पा रही थी। मेरे पति के मोटिवेशन और मेंटरिंग ने मुझे न सिर्फ पहले जैसी ताकत दिलाई, बल्कि प्रदर्शन को और बेहतर बनाने में भी मदद की।”
भिवानी की बेटी बॉक्सर जैस्मिन लंबोरिया ने ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इंग्लैंड की एलीस ग्लिन को 4-1 से हराया। इस जीत के साथ ही जैस्मिन लंबोरिया ने 57 किग्रा भार वर्ग के सेमीफाइनल में प्रवेश किया है। वहीं भारत के लिए बॉक्सिंग में पदक भी पक्का कर दिया है।
क्वार्टर फाइनल मुकाबला जीतने के बाद जैस्मिन ने कहा कि यह सफर यहीं खत्म नहीं होता। अभी और बाउट हैं, अगली फाइट पर पूरा फोकस रहेगा। वे इस बार मेडल का रंग बदलने के लिए आई है। पिछली बार ब्रांज मेडल रह गया था।