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भिवानी।
बवानी खेड़ा के खसरा नं. 295/7 स्थित अपने आवास से बेदखल किए गए रामकिशन पुत्र जुगलाल एवं उसके परिवार ने माननीय न्यायालय के आदेशों के आधार पर पुन: अपने निवास स्थान पर रहना प्रारम्भ कर दिया है। यह जानकारी मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनमोहन भुरटाना ने बताया कि रामकिशन एवं उसका परिवार पिछले कई दशकों से खसरा नं. 295/7, राजस्व संपदा बवानी खेड़ा में निवास कर रहा था। नगरपालिका द्वारा जारी नोटिसों में खसरा नं. 266 का उल्लेख किया गया था, जबकि वास्तविक कार्रवाई खसरा नं. 295 में स्थित मकान के विरुद्ध की गई। यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में सिविल न्यायालय भिवानी में मुकदमा दायर किया गया, जिसमें न्यायालय ने स्थानीय आयुक्त नियुक्त किया। स्थानीय आयुक्त द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आया कि विवादित मकान खसरा नं. 295 में स्थित है, जबकि नोटिस खसरा नं. 266 के संबंध में जारी किए गए थे।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने 13 मई 2026 को आदेश पारित करते हुए प्रतिवादी नगरपालिका को नोटिस दिनांक 20 अप्रैल 2026 के आधार पर किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई करने से रोकते हुए स्टेटस क्यू बनाए रखने का निर्देश दिया था।
इसके बावजूद दिनांक 19 मई 2026 को भारी पुलिस बल एवं नगरपालिका अधिकारियों की मौजूदगी में रामकिशन, उसके परिवार तथा अन्य प्रभावित परिवारों को उनके घरों से हटाकर पुलिस वाहनों में बैठाकर गांव की एक चौपाल में पहुंचा दिया गया। परिवार के सदस्यों के अनुसार उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध वहां रखा गया तथा उनके घरेलू सामान को भी अस्त-व्यस्त किया गया। महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों को अत्यधिक गर्मी में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
अधिवक्ता मनमोहन भुरटाना ने बताया कि उक्त कार्रवाई के बाद पुन: माननीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिनांक 26 मई 2026 को एक विस्तृत आदेश पारित किया।
अपने आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी अन्य स्थान पर रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता तथा किसी व्यक्ति के निवास स्थान से उसे हटाने की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन एवं आश्रय के अधिकारों को प्रभावित करती है।
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि स्थानीय पुलिस सहित प्रतिवादियों को, अगले आदेश तक, वादियों को भवानी खेड़ा के राजस्व एस्टेट के खसरा संख्या 295/7 में स्थित उनके जर्जर मकानों में रहने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है। अर्थात् प्रतिवादीगण तथा स्थानीय पुलिस को यह अधिकार नहीं है कि वे रामकिशन एवं उसके परिवार को खसरा नं. 295/7 स्थित उनके मकान में रहने से रोकें। अधिवक्ता मनमोहन भुरटाना ने कहा कि न्यायालय ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आश्रय, गरिमा एवं जीवन के अधिकार को महत्वपूर्ण माना है। न्यायालय ने यह भी माना कि किसी व्यक्ति का घर केवल एक भवन नहीं होता बल्कि उसकी आजीविका, सुरक्षा, सामाजिक सम्मान तथा परिवार का आधार होता है। उन्होंने बताया कि रामकिशन के परिवार के छोटे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई, परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई तथा पशुपालन और अन्य जीविकोपार्जन के साधनों को भी गंभीर क्षति पहुंची। ऐसी परिस्थितियों में न्यायालय द्वारा पारित आदेशों ने प्रभावित परिवारों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। अधिवक्ता मनमोहन भुरटाना ने कहा कि न्यायालय के आदेशों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है तथा कानून के शासन में न्यायालय के आदेश सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा व्यक्त की कि न्यायालय के आदेशों की पूर्ण पालना सुनिश्चित की जाए तथा भविष्य में किसी भी प्रभावित परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।