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भिवानी।
अधिवक्ता मीना चौपड़ा व अधिवक्ता राजेश सिंधू का एक मामले में सार्वजनिक तौर पर सम्मान को ठेस पहुंचाने तथा उपहास उड़ाने के मामले में अदालत ने विधायक कपूर सिंह बाल्मीकि को सम्मन जारी किए है। अदालत ने विधायक को 9 अक्तूबर को न्यायाधीश के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए है।
अधिवक्ता दम्पति राजेश सिंधु और मीना चोपड़ा की पेशेवर प्रतिष्ठा पर की गई झूठी और मानहानिकारक टिप्पणियों के मामले में दोनों ने मानहानि से हुए नुकसान के मुआवजे की वसूली के लिए अदालत में मुकदमा दायर किया है। दोनों अधिवक्ताओं द्वारा दायर उक्त वाद पर सुनवाई करते हुए सोहन लाल मलिक, सिविल जज (सीनियर डिवीजन), भिवानी की अदालत ने बवानी खेड़ा के विधायक कपूर सिंह बाल्मीकि को दिनांक नौ अक्तूबर को अदालत में पेश होने के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि वे (दम्पति) न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता हैं। श्री सिंधु पूर्व में बार एसोसिएशन, भिवानी के कोषाध्यक्ष तथा कस्बे की सहकारी बैंक व मार्केटिंग सोसायटी के निदेशक भी रहे हैं और सामाजिक संस्था हरियाणा जागृति मोर्चा एनजीओ के अध्यक्ष भी हैं।
क्या था मामला
बवानीखेड़ा में मई 2026 में वाल्मीकि व सांसी अति-अनुसूचित जाति समाज के कुछ गरीब परिवार, जिनके मकानों पर नगर पालिका प्रशासन द्वारा पीला पंजा चलाकर तोड़ने की कार्रवाई की जानी थी, वे कानूनी मदद के लिए और मीना चोपड़ा के उसी वार्ड की पूर्व पार्षद होने के कारण अधिवक्ता दम्पति के पास आए थे। अपने सामाजिक व पेशेवर कर्तव्य का पालन करते हुए दोनों ने चार मई को प्रशासन को एक लिखित प्रार्थना पत्र दिया था। परन्तु पीड़ित परिवारों के घर नहीं बच पाए और मकानों पर पीला पंजा चलाए जाने के बाद अकेली मीना चोपड़ा ने आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर विधायक कपूर बाल्मीकि के घर के सामने, तोड़े गए मकानों की जगह पर ही धरना शुरू कर दिया, जो बाद में बड़ा आंदोलन बन गया।
इसी दौरान 10 मई को कस्बे के वाल्मीकि मंदिर में पीड़ितों को बुलाकर एक बैठक आयोजित की गई। बाद में आरोप है कि उक्त मसले पर बाद में बैठक कर विधायक महोदय द्वारा उक्त दोनों अधिवक्ता दम्पति के बारे में आरोप लगाया कि पूरा शहर जानता है राजेश सिंधु को, ये हिंसा फैलाने वाला आदमी है, ये यहाँ भड़का कर आदमियों को मरवा देगा… ये तो पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये की गठरी बांधे बैठे हैं दोनों और अन्य उपहास उड़ाने वाली बातें कही तथा धमकियां भी दी गईं। दुख की बात है कि इस पूरी बैठक की वीडियो को भिवानी समाचार, केटीएल हरियाणा न्यूज, प्रथम गूंज सहित कई फेसबुक, यूट्यूब और व्हाट्सएप ग्रुपों पर वायरल कर दिया गया।
कहने के बावजूद भी लगातार उक्त वीडियों व ऑडियो वायरल करवाता रहा। उसने उनके वायरल होने से रूकवाया तक नहीं,जबकि विधायक द्वारा मंदिर व बैठक में कही गई बातें पूरी तरह से झूठी और बेबुनियाद हैं। अधिवक्ता दम्पति ने कहा कि उन्होंने जीवन में कभी किसी को हिंसा के लिए नहीं उकसाया है। पैसों की गठरी वाला आरोप भी सरासर झूठ है और इस तरह उपहास उड़ाना व धमकी देना भी गलत है।
वे हमेशा गरीब व जरूरतमंद लोगों की निशुल्क मदद करते रहे है। विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों से अधिवक्ता दम्पति की सामाजिक और पेशेवर छवि को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने विधायक से 8 जून को कानूनी नोटिस देकर सार्वजनिक माफी मांगने और वीडियो हटाने की मांग की थी, लेकिन उनके वकील के माध्यम से सात जुलाई को मिले जवाब में माफी से इनकार कर दिया गया। इसके बाद अधिवक्ता दम्पति को मानहानि के दावे और अस्थायी रोक के लिए अदालत जाना पड़ा। अदालत ने उनके पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला मानते हुए विधायक को 9 अक्टूबर को तलब किया है।