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भिवानी
जिला भिवानी के थाना बवानी खेड़ा क्षेत्र में युवती के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने तथा शव को खुर्द-बुर्द करने के मामले में माननीय न्यायालय ने दोषी नटवर सिंह और रविंद्र को कठोर कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई है। माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार दोषियों को विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई गई है।
*मामले का विवरण:*
थाना बवानी खेड़ा क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने थाना बवानी खेड़ा पुलिस को शिकायत दर्ज करवाते हुए आरोप लगाया था कि उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई तथा साक्ष्य मिटाने और शव को खुर्द-बुर्द करने की नीयत से शव को नहर में डाल दिया गया। शिकायत के आधार पर थाना बवानी खेड़ा में संबंधित धाराओं के तहत अभियोग दर्ज कर पुलिस द्वारा मामले की जांच शुरू की गई।
जिला पुलिस की टीम ने मामले में प्रभावी कानूनी कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों तथा प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप माननीय न्यायालय ने दोषियों को अभियोग में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
*दोषियों के नाम एवं सजा का विवरण:*
*1. नटवर सिंह पुत्र रामचंद्र, निवासी किरावड़, जिला भिवानी*
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास तथा 50,000 रुपये जुर्माना। जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 238(b) के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास तथा 20,000 रुपये जुर्माना। जुर्माना अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास।
*2. रविंद्र पुत्र स्वर्गीय धर्मबीर, निवासी चंदावास, हाल निवासी किरावड़, जिला भिवानी
-भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास तथा 50,000 रुपये जुर्माना। जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 238(b) के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास तथा 20,000 रुपये जुर्माना। जुर्माना अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(va) के तहत आजीवन कारावास तथा 10,000 रुपये जुर्माना। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कठोर कारावास।
*पुलिस अधीक्षक भिवानी मयंक मिश्रा, IPS के निर्देश:
पुलिस अधीक्षक भिवानी मयंक मिश्रा, IPS ने जिला पुलिस को निर्देश दिए हैं कि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में तुरंत प्रभावी कानूनी कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए। साथ ही, न्यायालय में मुकदमों की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए, ताकि दोषियों को सजा दिलाकर पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाया जा सके।