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बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन हरियाणा के आह्वान पर 12 से 2 बजे तक सांकेतिक रोष प्रदर्शन कर सिविल सर्जन के माध्यम से मुख्यमंत्री हरियाणा को ज्ञापन सौंपा। रोष प्रदर्शन करते हुए जिला प्रधान रविंद्र कुमार व राज्य प्रधान शर्मिला देवी ने बताया कि सरकार द्वारा लागू की जा रही मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी में एमपीएचडब्ल्यू मेल-फीमले वर्ग को शामिल करना ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के हित में नहीं है। सरकार ने पारदर्शी तबादले का सपना तो दिखाया, लेकिन रेशनलाइजेशन के नाम पर पदों को कैप करने और अन्य तकनीकी गड़बडिय़ों से पॉलिसी में आदर्श जैसा कुछ नहीं है।
एसोसिएशन ने एमओटीपी से छूट के पक्ष में निम्न तर्क रखे:
1. एमपीएचडब्ल्यू का कार्य सब-सेंटर/एचडब्ल्यूसी पर टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, मलेरिया/डेंगू नियंत्रण जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों से सीधा जुड़ा है, जो स्थानीय स्थिरता पर टिका है।
2. एमपीएचडब्ल्यू का कार्य समुदाय आधारित है। एक एमपीएचडब्ल्यू को अपने क्षेत्र के टीबी, बीपी, शुगर, गर्भवती महिलाओं व हाई-रिस्क बच्चों की पूरी जानकारी होती है। बार-बार तबादले से पेशेंट-प्रोवाइडर रिलेशन और फॉलो-अप का चक्र टूट जाएगा, जिसका सीधा असर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर पड़ेगा।
3. राष्ट्रीय लक्ष्य जैसे टीबी मुक्त हरियाणा, पल्स पोलियो, मलेरिया उन्मूलन माइक्रो-प्लानिंग पर निर्भर हैं। नए क्षेत्र में जमने में 6 से 9 महीने लग जाते हैं।
4. एचडब्ल्यूसी / आयुष्मान आरोग्य मंदिर मॉडल के तहत हेल्थ रिकॉड्र्स और एनसीडी पॉर्टल, एनमोल ऐप पर डिजिटल एंट्री बाधित होगी।
5. एमपीएचडब्ल्यू मेल-फीमेल को दुर्गम गांवों, कच्ची सडक़ों पर डोर-टू-डोर सर्वे करना पड़ता है। ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए दूर-दराज के जिलों में तैनाती से सुरक्षा, आवास और आवागमन की गंभीर समस्या खड़ी होगी।
मुख्य मांग:
बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन हरियाणा ने विनम्र अनुरोध किया है कि एमओटीपी प्रक्रिया से एमपीएचडब्ल्यू, एमपीएचएस वर्ग को बाहर रखा जाए और जो कर्मचारी पहले से ही दूर-दराज के जिलों में कार्यरत हैं, उन्हें अपने गृह जिले के नजदीक तबादले का अवसर प्रदान किया जाए। इस मौके पर राज्य प्रधान एमपीएचई एसोसिएशन शर्मिला देवी , जिला प्रधान रवींद्र सिंह , पूर्व राज्य महासचिव हरिनिवास समेत जिला और ब्लॉक कार्यकारिणी के पदाधिकारी व सैकड़ों कर्मचारी शामिल रहे।